श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.17.8 
न ब्रह्मा नेन्द्ररुद्राश्विवस्वादित्यमरुद‍्गणा:।
यस्य स्वरूपं जानन्ति प्रत्यक्षं याति मे हरि:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जिनके स्वरूप को ब्रह्मा, इन्द्र, रुद्र, अश्विनीकुमार, वसुगण, आदित्य और मरुद्गण आदि कोई नहीं जानते, वही हरि आज मेरे नेत्रों के विषय होंगे॥8॥
 
Whose form none like Brahma, Indra, Rudra, Ashwini Kumar, Vasugan, Aditya and Marudgan etc. know, today only that Hari will be the subject of my eyes. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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