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श्लोक 5.17.31  |
अप्येष मां कंसपरिग्रहेण
दोषास्पदीभूतमदोषदुष्टम्।
कर्तावमानोपहतं धिगस्तु
तज्जन्म यत्साधुबहिष्कृतस्य॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| क्या वही भगवान विष्णु मुझ निर्दोष को कंस-संग का दोषी ठहराकर मेरी अवज्ञा करेंगे? संतों द्वारा तिरस्कृत मनुष्य के रूप में मेरे जन्म को धिक्कार है ॥31॥ |
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| Will the same Lord Vishnu disobey me by holding me, who is innocent, guilty of the association with Kansa? Shame on my birth as a person who is rejected by the saints. ॥ 31॥ |
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