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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा
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श्लोक 26
श्लोक
5.17.26
तदेतत्परमं धाम तदेतत्परमं पदम्।
भगवद्वासुदेवांशो द्विधा योऽयं व्यवस्थित:॥ २६॥
अनुवाद
[और उसने मन ही मन कहा,] इन दोनों रूपों में स्थित भगवान वासुदेव का अंश ही परम धाम और परम गति है ॥26॥
[And he said to himself,] The portion of Lord Vasudeva situated in these two forms is the supreme abode and the ultimate state. ॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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