| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा » श्लोक 20 |
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| | | | श्लोक 5.17.20  | प्रफुल्लपद्मपत्राक्षं श्रीवत्साङ्कितवक्षसम्।
प्रलम्बबाहुमायामतुङ्गोर:स्थलमुन्नसम्॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | जिनके नेत्र खिले हुए कमल के समान थे, वक्षस्थल श्रीवत्स के चिह्न से सुशोभित था, भुजाएं लंबी थीं, वक्षस्थल बड़ा और ऊंचा था तथा नाक ऊंची उठी हुई थी। | | | | Whose eyes were like blooming lotuses, chest was adorned with the symbol of Shrivatsa, arms were long, chest was large and high and nose was raised high. | | ✨ ai-generated | | |
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