श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.17.18 
श्रीपराशर उवाच
इत्थं सञ्चिन्तयन्विष्णुं भक्तिनम्रात्ममानस:।
अक्रूरो गोकुलं प्राप्त: किञ्चित्सूर्ये विराजति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मैत्रेय! इस प्रकार भक्तियुक्त मन वाले और भगवान विष्णु का चिन्तन करते हुए अक्रूरजी सूर्योदय होते ही गोकुल पहुँच गए॥18॥
 
Shri Parasharji said – O Maitreya! Akrurji, having devotional mind and thus thinking about Lord Vishnu, reached Gokul as soon as the sun rose. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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