| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 5.17.16  | यथा यत्र जगद्धाम्नि धातर्येतत्प्रतिष्ठितम्।
सदसत्तेन सत्येन मय्यसौ यातु सौम्यताम्॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | जिस सत्य की शक्ति से यह शुभ-अशुभ जगत् उस जगत्-पालक सृष्टिकर्ता में स्थित है, उसी सत्य के द्वारा प्रभु मुझ पर प्रसन्न हों॥16॥ | | | | By the (truth) power of truth by which this world of good and bad exists in that world-supporting Creator, may the Lord be pleased with me. ॥16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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