श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.17.1 
श्रीपराशर उवाच
अक्रूरोऽपि विनिष्क्रम्य स्यन्दनेनाशुगामिना।
कृष्णसंदर्शनाकाङ्क्षी प्रययौ नन्दगोकुलम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - अक्रूरजी भी श्रीकृष्ण के दर्शन की इच्छा से तत्काल मथुरापुरी छोड़कर तीव्र गति के रथ पर सवार होकर नन्दजी के गोकुल में चले गए॥1॥
 
Shri Parasharji said - Akrurji also immediately left Mathurapuri and went to Nandji's Gokul in a fast chariot with the desire to see Shri Krishna. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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