vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 16: केशि-वध
»
श्लोक 19
श्लोक
5.16.19
साधु साधु जगन्नाथ लीलयैव यदच्युत।
निहतोऽयं त्वया केशी क्लेशदस्त्रिदिवौकसाम्॥ १९॥
अनुवाद
"हे जगन्नाथ! हे अच्युत!! आप धन्य हैं, धन्य हैं। अहा! आपने अपनी लीला से देवताओं को कष्ट देने वाले इस केशी को मार डाला है। 19.
"O Jagannath! O Achyuta!! You are blessed, blessed. Aha! You have killed this Keshi, who was troubling the gods, with your own leela. 19.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×