श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 16: केशि-वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.16.19 
साधु साधु जगन्नाथ लीलयैव यदच्युत।
निहतोऽयं त्वया केशी क्लेशदस्त्रिदिवौकसाम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
"हे जगन्नाथ! हे अच्युत!! आप धन्य हैं, धन्य हैं। अहा! आपने अपनी लीला से देवताओं को कष्ट देने वाले इस केशी को मार डाला है। 19.
 
"O Jagannath! O Achyuta!! You are blessed, blessed. Aha! You have killed this Keshi, who was troubling the gods, with your own leela. 19.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)