श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 16: केशि-वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.16.17 
ततो गोप्यश्च गोपाश्च हते केशिनि विस्मिता:।
तुष्टुवु: पुण्डरीकाक्षमनुरागमनोरमम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
केशी के वध से विस्मित हुए गोप-गोपियों ने प्रेमपूर्वक अत्यन्त सुन्दर दिखने वाले कमलनयन श्री श्यामसुन्दर की स्तुति की॥17॥
 
The Gopas and Gopis, who were astonished by the killing of Keshi, out of love praised the lotus-eyed Shri Shyamsundar who looked very beautiful. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)