श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 16: केशि-वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.16.14 
व्यादितास्यमहारन्ध्रस्सोऽसुर: कृष्णबाहुना।
निपातितो द्विधा भूमौ वैद्युतेन यथा द्रुम:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वह महादैत्य जिसके मुख का विशाल छिद्र श्रीकृष्ण की भुजाओं से खुल गया था, मरकर दो टुकड़ों में टूटकर वज्र से गिरे हुए वृक्ष के समान पृथ्वी पर गिर पड़ा॥14॥
 
Thus, that great demon whose mouth's huge hole had been opened by Sri Krishna's arm, after dying, broke into two pieces and fell on the earth like a tree fallen by thunderbolt. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)