श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 16: केशि-वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.16.13 
जघान धरणीं पादैश्शकृन्मूत्रं समुत्सृजन्।
स्वेदार्द्रगात्रश्शान्तश्च निर्यत्नस्सोऽभवत्तदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर वह भूमि पर पैर पटकने लगा, मल-मूत्र त्यागने लगा, पसीने से उसका शरीर ठंडा पड़ गया और वह अचेत हो गया ॥13॥
 
Then he started stamping his feet on the ground, excreting urine and feces. His body became cold due to sweat and he became unconscious. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)