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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 15: कंसका श्रीकृष्णको बुलानेके लिये अक्रूरको भेजना
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श्लोक 4
श्लोक
5.15.4
श्रुत्वा तत्सकलं कंसो नारदाद्देवदर्शनात्।
वसुदेवं प्रति तदा कोपं चक्रे सुदुर्मति:॥ ४॥
अनुवाद
देवदर्शन नारदजी से ये सब बातें सुनकर मूर्ख कंस ने वसुदेवजी पर अत्यंत क्रोध प्रकट किया॥4॥
Hearing all these things from Devdarshan Naradji, the foolish Kansa expressed extreme anger towards Vasudevji. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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