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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 15: कंसका श्रीकृष्णको बुलानेके लिये अक्रूरको भेजना
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श्लोक 18
श्लोक
5.15.18
तौ हत्वा वसुदेवं च नन्दगोपं च दुर्मतिम्।
हनिष्ये पितरं चैनमुग्रसेनं सुदुर्मतिम्॥ १८॥
अनुवाद
इस प्रकार उनका वध करके मैं दुर्मति वसुदेव, नन्दगोप और अपने मंदमति पिता उग्रसेन को भी मार डालूँगा॥18॥
By killing them in this way, I will also kill Durmati Vasudev, Nandagop and my Mandamati father Ugrasena. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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