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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 15: कंसका श्रीकृष्णको बुलानेके लिये अक्रूरको भेजना
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श्लोक 13
श्लोक
5.15.13
कंस उवाच
भो भो दानपते वाक्यं क्रियतां प्रीतये मम।
इत: स्यन्दनमारुह्य गम्यतां नन्दगोकुलम्॥ १३॥
अनुवाद
कंस ने कहा- हे दाता! मुझे प्रसन्न करने के लिए मेरी एक वस्तु स्वीकार कर लीजिए। यहाँ से रथ पर सवार होकर नंद के गोकुल में जाइए।
Kansa said- O donor! To make me happy, please accept one thing of mine. From here, board the chariot and go to Nanda's Gokul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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