vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 15: कंसका श्रीकृष्णको बुलानेके लिये अक्रूरको भेजना
»
श्लोक 13
श्लोक
5.15.13
कंस उवाच
भो भो दानपते वाक्यं क्रियतां प्रीतये मम।
इत: स्यन्दनमारुह्य गम्यतां नन्दगोकुलम्॥ १३॥
अनुवाद
कंस ने कहा- हे दाता! मुझे प्रसन्न करने के लिए मेरी एक वस्तु स्वीकार कर लीजिए। यहाँ से रथ पर सवार होकर नंद के गोकुल में जाइए।
Kansa said- O donor! To make me happy, please accept one thing of mine. From here, board the chariot and go to Nanda's Gokul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×