श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.13.8 
देवो वा दानवो वा त्वं यक्षो गन्धर्व एव वा।
किमस्माकं विचारेण बान्धवोऽसि नमोऽस्तुते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
चाहे आप देवता हों, दानव हों, यक्ष हों या गन्धर्व हों, इन विषयों पर विचार करने से क्या लाभ? आप हमारे मित्र हैं, अतः मैं आपको नमस्कार करता हूँ ॥8॥
 
Whether you are a god, a demon, a yaksha or a gandharva, what is the use of thinking about these matters? You are our friend, so I salute you. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)