श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.13.7 
बालत्वं चातिवीर्यत्वं जन्म चास्मास्वशोभनम्।
चिन्त्यमानममेयात्मञ्छङ्का कृष्ण प्रयच्छति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण! तुम्हारा बचपन, तुम्हारा असाधारण बल और पराक्रम, तथा हम जैसे तुच्छ प्राणियों के बीच तुम्हारा जन्म - हे अतुलनीय आत्मा! ये सब बातें विचार करने पर हमें संदेह में डाल देती हैं।॥7॥
 
O Krishna! Your childhood, your extraordinary strength and valour, and your birth among lowly beings like us - O incomparable soul! All these things, when considered, put us in doubt. ॥7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)