श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.13.62 
यथा समस्तभूतेषु नभोऽग्नि: पृथिवी जलम्।
वायुश्चात्मा तथैवासौ व्याप्य सर्वमवस्थित:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जैसे आकाश, अग्नि, पृथ्वी, जल, वायु और आत्मा सभी प्राणियों में विद्यमान हैं, वैसे ही वे भी सभी पदार्थों में विद्यमान हैं ॥62॥
 
Just as sky, fire, earth, water, air and soul are present in all living beings, in the same way He too is present in all objects. ॥ 62॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे त्रयोदशोऽध्याय:॥ १३॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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