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श्लोक 5.13.61  |
तद्भर्तृषु तथा तासु सर्वभूतेषु चेश्वर:।
आत्मस्वरूपरूपोऽसौ व्यापी वायुरिव स्थित:॥ ६१॥ |
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| अनुवाद |
| सर्वव्यापी भगवान श्री कृष्णचन्द्र ग्वाल-बालों में, उनके पतियों में तथा सम्पूर्ण प्राणियों में वायु के समान आत्मारूप में विद्यमान थे ॥ 61॥ |
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| The omnipresent God Shri Krishnachandra was present in the milkmaids, their husbands and in all creatures in the form of the soul, like the air. ॥ 61॥ |
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