श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  5.13.61 
तद्भर्तृषु तथा तासु सर्वभूतेषु चेश्वर:।
आत्मस्वरूपरूपोऽसौ व्यापी वायुरिव स्थित:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
सर्वव्यापी भगवान श्री कृष्णचन्द्र ग्वाल-बालों में, उनके पतियों में तथा सम्पूर्ण प्राणियों में वायु के समान आत्मारूप में विद्यमान थे ॥ 61॥
 
The omnipresent God Shri Krishnachandra was present in the milkmaids, their husbands and in all creatures in the form of the soul, like the air. ॥ 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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