श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.13.57 
गतेऽनुगमनं चक्रुर्वलने सम्मुखं ययु:।
प्रतिलोमानुलोमाभ्यां भेजुर्गोपाङ्गना हरिम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान आगे चलते तो गोपियाँ उनके पीछे-पीछे चलतीं और जब वे लौटते तो उनके आगे-आगे चलतीं। इस प्रकार वे श्रीहरि के आगे-पीछे चलने में उनके साथ रहतीं ॥57॥
 
When the Lord went ahead the Gopis would follow him and when he returned they would walk in front of him. In this way they accompanied Sri Hari in their forward and backward movements. ॥57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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