श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  5.13.55 
गोपीकपोलसंश्लेषमभिगम्य हरेर्भुजौ।
पुलकोद‍्गमसस्याय स्वेदाम्बुघनतां गतौ॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
गोपियों के कपोलों का चुम्बन पाकर श्रीहरि की भुजाएँ पसीने के रूप में जल के बादल बन गईं और उन पर पुलकावली रूपी अन्न उत्पन्न होने लगे ॥55॥
 
On receiving the kisses of the cheeks of the Gopis, the arms of Shri Hari became clouds of water in the form of sweat to produce grains in the form of Pulkavali on them. ॥55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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