श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.13.54 
काचित्प्रविलसद‍्बाहु: परिरभ्य चुचुम्ब तम्।
गोपी गीतस्तुतिव्याजान्निपुणा मधुसूदनम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
एक सिद्ध गोपी ने भगवान् के भजनों का गुणगान करने के बहाने अपनी भुजाएँ फैलाकर श्रीमधुसूदन को गले लगाया और उन्हें चूमा ॥ 54॥
 
An accomplished gopi, under the pretext of praising the Lord's songs, stretched out her arms and embraced Sri Madhusudana and kissed him. ॥ 54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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