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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
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श्लोक 53
श्लोक
5.13.53
परिवृत्तिश्रमेणैका चलद्वलयलापिनीम्।
ददौ बाहुलतां स्कन्धे गोपी मधुनिघातिन:॥ ५३॥
अनुवाद
तब एक गोपी ने नाचते-नाचते थककर अपनी चंचल चूड़ियों की झनकार के साथ अपनी बांह श्रीमधुसूदन के गले में डाल दी।
Then a Gopi, tired of dancing, placed her arm, accompanied by the tinkling sound of her playful bangles, around Sri Madhusudan's neck. 53.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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