श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.13.49 
रासमण्डलबन्धोऽपि कृष्णपार्श्वमनुज्झता।
गोपीजनेन नैवाभूदेकस्थानस्थिरात्मना॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उस समय कोई भी गोपी कृष्ण के समीप से हटना नहीं चाहती थी; अतः एक ही स्थान पर रहने के कारण नृत्य के लिए उपयुक्त घेरा नहीं बन सका ॥49॥
 
However, at that time, no gopi wanted to leave the vicinity of Krishna; therefore, due to staying at one place, the appropriate circle for the dance could not be formed. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)