श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.13.47 
तत: काञ्चित्प्रियालापै: काञ्चिद‍्भ्रूभङ्गवीक्षितै:।
निन्येऽनुनयमन्यां च करस्पर्शेन माधव:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तब श्री माधव ने कुछ लोगों से मीठी-मीठी बातें करके, कुछ को क्रोधित दृष्टि से देखकर तथा कुछ का हाथ पकड़कर उन्हें समझाना आरम्भ किया।
 
Then Sri Madhava began to persuade some by speaking sweetly to them, looking at some with a frown and holding the hand of some.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)