प्रविष्टो गहनं कृष्ण: पदमत्र न लक्ष्यते।
निवर्तध्वं शशाङ्कस्य नैतद्दीधितिगोचरे॥ ४१॥
अनुवाद
यहाँ से कृष्णचन्द्र गहन वन में चले गए हैं, इसलिए उनके चरणचिह्न दिखाई नहीं दे रहे हैं; अब तुम सब लौट जाओ; चन्द्रमा की किरणें यहाँ तक नहीं पहुँच सकतीं ॥41॥
From here Krishnachandra has gone into the deep forest, therefore his footprints are not visible; now all of you return; the rays of the moon cannot reach this place. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥