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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
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श्लोक 32
श्लोक
5.13.32
ध्वजवज्राङ्कुशाब्जाङ्करेखावन्त्यालि पश्यत।
पदान्येतानि कृष्णस्य लीलाललितगामिन:॥ ३२॥
अनुवाद
हे प्रिये! इन लीला ललितगामी कृष्णचन्द्र के ध्वज, वज्र, अंकुश और कमल आदि की रेखाओं से सुशोभित चरणचिह्नों को देखो॥32॥
Oh dear! Look at the footprints decorated with the lines of the flag, thunderbolt, goad and lotus etc. of this Leela Lalitgami Krishnachandra. 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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