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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
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श्लोक 31
श्लोक
5.13.31
विलोक्यैका भुवं प्राह गोपी गोपवराङ्गना।
पुलकाञ्चितसर्वाङ्गी विकासिनयनोत्पला॥ ३१॥
अनुवाद
खिले हुए कमल पुष्पों के समान नेत्रों वाली, सम्पूर्ण रूप से रोमांचित, एक सुन्दर गोप कन्या पृथ्वी की ओर देखकर बोली -॥31॥
A beautiful Gopa girl with eyes like blooming lotus flowers, thrilled all over, looking towards the earth said -॥ 31॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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