श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.13.27 
दुष्टकालिय तिष्ठात्र कृष्णोऽहमिति चापरा।
बाहुमास्फोटॺ कृष्णस्य लीलया सर्वमाददे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कोई दूसरी गोपी अपनी भुजाएँ पटककर कहती, "अरे, दुष्ट कालिया! मैं कृष्ण हूँ, ठहरो एक क्षण।" ऐसा कहकर वह कृष्ण के समस्त गुणों का क्रीड़ापूर्वक अनुकरण करने लगती॥ 27॥
 
Some other gopi would bang her arms and say, "Hey, you wicked Kaliya! I am Krishna, wait a moment." Saying so, she would start imitating all the characteristics of Krishna in a playful manner.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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