| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना » श्लोक 25-26 |
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| | | | श्लोक 5.13.25-26  | कृष्णे निबद्धहृदया इदमूचु: परस्परम्॥ २५॥
कृष्णोऽहमेष ललितं व्रजाम्यालोक्यतां गति:।
अन्या ब्रवीति कृष्णस्य मम गीतिर्निशम्यताम्॥ २६॥ | | | | | | अनुवाद | | कृष्ण में लीन व्रजकन्याएँ आपस में इस प्रकार वार्तालाप करने लगीं - [एक गोपी कहती -] "मैं कृष्ण हूँ; देखो, मैं कितनी मनोहरता से चलती हूँ; मेरी चाल तो देखो।" दूसरी कहती - "मैं कृष्ण हूँ, अहा! मेरा गाना सुनो।"॥25-26॥ | | | | The Vraja girls, absorbed in Krishna, began to converse with each other in this manner - [One of the gopis would say -] "I am Krishna; see, how gracefully I walk; just look at my movement." The other would say - "I am Krishna, aha! Listen to my song."॥25-26॥ | | ✨ ai-generated | | |
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