श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.13.24 
गोप्यश्च वृन्दश: कृष्णचेष्टास्वायत्तमूर्तय:।
अन्यदेशं गते कृष्णे चेरुर्वृन्दावनान्तरम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब भगवान श्रीकृष्ण अन्यत्र गए हुए थे, तब कृष्ण के प्रभाव में आई हुई गोपियाँ, युवक रूप बनाकर वृन्दावन के अन्दर विचरण करने लगीं॥24॥
 
At that time, when Lord Krishna went somewhere else, the Gopis who came under the influence of Krishna, formed a youth and started wandering inside Vrindavan. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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