श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.13.2 
वयमस्मान्महाभाग भगवन्महतो भयात्।
गावश्च भवता त्राता गिरिधारणकर्मणा॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे महाप्रभु! आपने गिरिराज को धारण करके हमारी और गौओं की इस महान भय से रक्षा की है॥2॥
 
O Lord! O great one! By holding Giriraj you have protected us and the cows from this great fear. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)