श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.13.19 
काचित्कृष्णेति कृष्णेति प्रोच्य लज्जामुपाययौ।
ययौ च काचित्प्रेमान्धा तत्पार्श्वमविलम्बितम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
कुछ तो लज्जा से सिकुड़कर “हे कृष्ण, हे कृष्ण” कहते हुए चले गए और कुछ प्रेम में मतवाले होकर तुरन्त ही उनके पास जाकर खड़े हो गए॥19॥
 
Some shrunk with shyness saying, "Oh Krishna, Oh Krishna" and some, intoxicated with love, immediately went and stood near Him.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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