श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.13.18 
शनैश्शनैर्जगौ गोपी काचित्तस्य लयानुगम्।
दत्तावधाना काचिच्च तमेव मनसास्मरत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर कुछ गोपियाँ उनके साथ धीरे-धीरे गाने लगीं और कुछ मन ही मन उनका स्मरण करने लगीं॥18॥
 
Upon reaching there some Gopis began to softly sing along with him while some others began to remember him in their hearts.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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