श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.11.13 
ततस्तद‍्गोकुलं सर्वं गोगोपीगोपसङ्कुलम्।
अतीवार्त्तं हरिर्दृष्ट्वा मैत्रेयाचिन्तयत्तदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! उस समय गौओं, गोपियों और ग्वालों सहित सम्पूर्ण गोकुल को अत्यन्त व्याकुल देखकर भगवान हरि ने विचार किया ॥13॥
 
O Maitreya! At that time seeing the entire Gokul, including the cows, gopis and the cowherds, extremely distressed, Lord Hari thought. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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