श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.11.1 
श्रीपराशर उवाच
मखे प्रतिहते शक्रो मैत्रेयातिरुषान्वित:।
संवर्तकं नाम गणं तोयदानामथाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मैत्रेय! अपने यज्ञ के रुक जाने से इन्द्र अत्यन्त क्रोधित हो उठे और संवर्तक नामक मेघों के समूह से इस प्रकार बोले -॥1॥
 
Shri Parasharji said – O Maitreya! Due to the stoppage of his yagya, Indra became very angry and said to the group of clouds named Samvartaka in this way -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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