श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.10.49 
अन्तर्द्धानं गते तस्मिन्गोपालब्ध्वा ततो वरान्।
कृत्वा गिरिमखं गोष्ठं निजमभ्याययु: पुन:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, उनके अन्तर्धान हो जाने पर, ग्वालों ने इच्छित वरदान प्राप्त कर, गिरियज्ञ समाप्त किया और अपनी-अपनी गौशालाओं को लौट गये।
 
Thereafter, after his disappearance, the cowherds, having received the boons they desired, finished the Giriyagya and returned to their respective cowsheds.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे दशमोऽध्याय:॥ १०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)