श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  5.10.45-46 
द्विजांश्च भोजयामासुश्शतशोऽथ सहस्रश:॥ ४५॥
गावश्शैलंततश्चक्रुरर्चितास्ता: प्रदक्षिणम्।
वृषभाश्चातिनर्दन्तस्सतोया जलदा इव॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों-हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराया गया, फूलों से नहाई हुई गायें और गीले बादलों के समान गर्जना करते हुए बैलों ने गोवर्धन की परिक्रमा की।
 
Hundreds and thousands of brahmins were fed, and the cows bathed in flowers and the bulls roaring like wet clouds circumambulated Govardhan. 45-46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)