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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 10: शरद्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा
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श्लोक 30
श्लोक
5.10.30
विद्यया यो यया युक्तस्तस्य सा दैवतं महत्।
सैव पूज्यार्चनीया च सैव तस्योपकारिका॥ ३०॥
अनुवाद
जो व्यक्ति किसी विशेष ज्ञान से युक्त है, वही उसका इष्ट देवता है, वही पूजा के योग्य है और वही परम कल्याणकारी है ॥30॥
The person who is endowed with a particular knowledge is his favorite deity, he is worthy of worship and he is the ultimate benefactor. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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