श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.10.28 
कृषिर्वणिज्या तद्वच्च तृतीयं पशुपालनम्।
विद्या ह्येका महाभाग वार्त्ता वृत्तित्रयाश्रया॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! वर्त नामक ज्ञान कृषि, वाणिज्य और पशुपालन इन तीन व्यवसायों का आधार है।
 
O great man! The knowledge called Varta is the support of these three professions, agriculture, commerce and animal husbandry. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)