श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.10.26 
न वयं कृषिकर्त्तारो वाणिज्याजीविनो न च।
गावोऽस्मद्दैवतं तात वयं वनचरा यत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
"हे पिता! हम न तो किसान हैं, न ही व्यापारी, हमारे देवता तो केवल गायें हैं; क्योंकि हम वनवासी हैं।
 
"O father! We are neither farmers nor traders, our gods are only cows; because we are forest dwellers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)