श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.10.18 
कोऽयं शक्रमखो नाम येन वो हर्ष आगत:।
प्राह तं नन्दगोपश्च पृच्छन्तमतिसादरम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह इन्द्रिय-यज्ञ क्या है जिसके लिए आप सब लोग इतने प्रसन्न हैं? जब उन्होंने बड़े आदर से यह पूछा, तब नन्दगोप ने उनसे कहा-॥18॥
 
"What is that sense-sacrifice for which you all are so happy?" When he asked this with great respect, Nandagopa said to them -॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)