श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 84-85
 
 
श्लोक  5.1.84-85 
ये त्वामार्येति दुर्गेति वेदगर्भाम्बिकेति च।
भद्रेति भद्रकालीति क्षेमदा भाग्यदेति च॥ ८४॥
प्रातश्चैवापराह्णे च स्तोष्यन्त्यानम्रमूर्त्तय:।
तेषां हि प्रार्थितं सर्वं मत्प्रसादाद्भविष्यति॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग प्रातः और सायं आपको आर्या, दुर्गा, वेदगर्भा, अम्बिका, भद्रा, भद्रकाली, क्षेमदा और भाग्यदा आदि कहकर नम्रतापूर्वक आपकी स्तुति करेंगे, उनकी सभी मनोकामनाएँ मेरी कृपा से पूर्ण होंगी ॥84-85॥
 
Those who will humbly praise you in the morning and evening by calling you Arya, Durga, Vedagarbha, Ambika, Bhadra, Bhadrakali, Kshemada and Bhagyada etc., all their wishes will be fulfilled by my grace. 84-85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)