श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  5.1.83 
त्वं भूति: सन्नति: क्षान्ति: कान्तिर्द्यौ: पृथिवी धृति:।
लज्जा पुष्टिरुषा या तु काचिदन्या त्वमेव सा॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
आप ही भूत, शांति, शान्ति और प्रकाश हैं; आप ही आकाश, पृथ्वी, मृदा, लज्जा, पुष्टि और उषा हैं; इनके अतिरिक्त संसार में जो भी अन्य शक्ति है, वह सब आप ही हैं ॥83॥
 
You are the ghost, peace, peace and light; You are the sky, the earth, the soil, the shame, the confirmation and the dawn; Apart from these, whatever other power there is in the world, you are the one. 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)