श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  5.1.80 
कंसश्च त्वामुपादाय देवि शैलशिलातले।
प्रक्षेप्स्यत्यन्तरिक्षे च संस्थानं त्वमवाप्स्यसि॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
तब हे देवि! कंस तुम्हें पकड़कर पर्वत की चट्टान पर पटक देगा; जिस क्षण वह तुम्हें पटकेगा, तुम आकाश में स्थित हो जाओगी।
 
Then, O Goddess, Kamsa will catch hold of you and throw you on a mountain rock; the moment he throws you, you will be situated in the sky. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)