श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  5.1.77 
ततोऽहं सम्भविष्यामि देवकीजठरे शुभे।
गर्भे त्वया यशोदाया गन्तव्यमविलम्बितम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
हे शुभ! तत्पश्चात मैं देवकी के आठवें गर्भ में स्थित होऊँगा। उस समय तुम भी तुरन्त यशोदा के गर्भ में चले जाना। 77।
 
Thereafter, O Shubh! I will be placed in the eighth womb of Devaki. At that time you too should immediately go to the womb of Yashoda. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)