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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 72
श्लोक
5.1.72
श्रीभगवानुवाच
निद्रे गच्छ ममादेशात्पातालतलसंश्रयान्।
एकैकत्वेन षड्गर्भान्देवकीजठरं नय॥ ७२॥
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे निद्रा! जाओ, मेरी आज्ञा से पाताल में स्थित छहों गर्भों को एक-एक करके देवकी के गर्भ में स्थापित करो।
Sri Bhagavan said - O Nidre! Go, by my order place the six wombs situated in the netherworld, one by one, in the womb of Devaki. 72.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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