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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 71
श्लोक
5.1.71
योगनिद्रा महामाया वैष्णवी मोहितं यया।
अविद्यया जगत्सर्वं तामाह भगवान्हरि:॥ ७१॥
अनुवाद
जिस अज्ञानस्वरूप से सारा जगत् मोहित हो रहा है, वह योगनिद्रा भगवान विष्णु की महामाया है, भगवान श्रीहरि ने उससे कहा - ॥71॥
The form of ignorance by which the whole world is being fascinated is the Mahamaya of Yoganidra Lord Vishnu, Lord Shri Hari said to her - ॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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