श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  5.1.70 
हिरण्यकशिपो: पुत्राष्षड्‍गर्भा इति विश्रुता:।
विष्णुप्रयुक्ता तान्निद्रा क्रमाद‍्गर्भानयोजयत्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा सुना जाता है कि पहले छह गर्भ हिरण्यकशिपु के पुत्रों के थे। भगवान विष्णु की प्रेरणा से योगनिद्रा उन्हें एक-एक करके गर्भ में स्थापित करती रही।*॥70॥
 
It is heard that the first six wombs were of Hiranyakashipu's sons. With the inspiration of Lord Vishnu, Yog nidra kept placing them in the womb one by one*॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)