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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 7
श्लोक
5.1.7
अथान्तरिक्षे वागुच्चै: कंसमाभाष्य सादरम्।
मेघगम्भीरनिर्घोषं समाभाष्येदमब्रवीत्॥ ७॥
अनुवाद
उसी समय आकाशवाणी ने मेघ के समान गम्भीर घोषणा करते हुए ऊँचे स्वर में कंस को सम्बोधित करते हुए कहा-॥7॥
At the same time, the voice of the sky, making a solemn announcement like a cloud, addressed Kansa in a loud voice and said – ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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