श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  5.1.68 
कंसोऽपि तदुपश्रुत्य नारदात्कुपितस्तत:।
देवकीं वसुदेवं च गृहे गुप्तावधारयत्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
नारद से यह समाचार पाकर कंस क्रोधित हो गया और उसने वसुदेव और देवकी को कारागार में डाल दिया।
 
On receiving this news from Narada, Kansa became enraged and imprisoned Vasudeva and Devaki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)